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lily25


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अभिव्यक्तियां आज बौराई हैं,,,,

Posted On: 31 May, 2017  
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मुझे विषय मत बनाओ,,,

Posted On: 24 May, 2017  
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प्यार लिखूँ

Posted On: 23 May, 2017  
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मै हूँ या तुम,,,

Posted On: 8 May, 2017  
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सुरक्षा का मांझा,,,,,नियन्त्रित उड़ान

Posted On: 2 May, 2017  
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प्यार उम्र का मोहताज नही होता

Posted On: 26 Apr, 2017  
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जब होने लगे पूर्वाभास,,,जीवन की सांझ हो चली ,,,

Posted On: 26 Apr, 2017  
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एक दिया प्यार का,,,,

Posted On: 5 Apr, 2017  
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के द्वारा: Noopur Noopur

के द्वारा: Bhola nath Pal Bhola nath Pal

हाल ही में हरिवंश राय बच्चन जी की आत्मकथा में पढ़ा था कि कविता वही है जो जीवननुभूत हो । जो कविता जीवन की अनुभूतियों से उपजे और शब्दों में ढले, हृदय ताल की गहनता से उठे और होठों तक आए; वही सच्चे अर्थों में कविता कहलाने की अधिकारिणी है । पूर्व में आपकी बहुत-सी भावभीनी और हृदयस्पर्शी कविताएं पढ़ीं । अब आपके इस भावपूर्ण लेख को पढ़कर यही लगता है कि आप जन्म से ही कवयित्री हैं, कविता आपका सहज गुण है, आपके स्वभाव एवं व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है । आपका यह लेख हृदय-विजयी है तथा आपके द्वारा उद्धृत विकास के तीनों ही चरणों के मापदण्डों पर खरा उतरता है । पढ़कर यही लगा कि आपसे बहुत कुछ सीखना है मुझे । साप्ताहिक सम्मान की आप पूर्ण अधिकारिणी हैं । हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन आपका ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: lily25 lily25

आपके डायरीनुमा दार्शनिक लेख ने मुझे भावुक कर दिया है । मुझे भी अपने पुराने बजाज सुपर स्कूटर से अत्यधिक लगाव है और जो भावनाएँ आपकी हैं, लगभग वही मेरी भी हैं । अंतर इतना ही है कि यही यातायात के मध्य स्कूटर चलते समय भूल मुझसे होती है तो मैं दूसरे व्यक्ति से क्षमा-याचना न भी कर सकूं तो भी स्वयं लज्जित अवश्य अनुभव करता हूँ एवं आगे के लिए सावधान हो जाता हूँ । मैंने राजस्थान में रावतभाटा नामक स्थान पर कई वर्ष बिताए एवं वहाँ से पचास किलोमीटर दूर कोटा शहर तक स्कूटर से जाना मेरा प्रिय शगल था । इस पचास किलोमीटर के मार्ग में दरा नाम का वनक्षेत्र भी आता है । जंगल के बीच से ऊंचे-नीचे रास्तों पर स्कूटर चलना और इस तरह एक ही यात्रा में दोनों ओर की दूरी मिलाकर सौ किलोमीटर अपने स्कूटर से तय करने का आनंद ही अद्भुत था जिसे केवल मैं समझता था, दूसरे नहीं । वर्षों बीत गए हैं उन यात्राओं को किए हुए और मेरे उस प्रिय स्थान का साथ छूटे हुए लेकिन आपका लेख पढ़कर लगा मानो कल की सी बात हो । आपने जीवन-यात्रा की तुलना स्कूटर की यात्रा से की है, वह भी मेरे विचारों एवं दृष्टिकोण से साम्य रखती है । इस रोचक तथा सारगर्भित लेख के लिए आपका आभार एवं अभिनंदन ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

उत्कृष्ट एवं विचारोत्तेजक आलेख है यह आपका । अन्तर्मन की उथल-पुथल तनाव तो देती है किन्तु आपका यह कथन भी पूर्णरूपेण सत्य है कि वह मस्तिष्क को दिशाज्ञान भी देती है । उचित यही है कि हम अपने मन में प्रस्फुटित होने वाले विभिन्न विचारों को उठने दें तथा उन्हें दृष्टाभाव से स्वीकार करें । वांछनीय यही है कि किसी भी विचार का उसकी भ्रूणावस्था में ही त्याग न करके सभी विचारों को मनोमंथन की प्रक्रिया से प्रभावित होने दिया जाए । संभव है कि सर्वोत्तम निर्णय का नवनीत इसी मंथन से निकले । आपका प्रत्येक आलेख आपकी प्रतिभा के अगाध समुद्र की एक बूंद प्रतीत होता है । बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है आपके सृजनों को पढ़कर ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur




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