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पहली बारिश

Posted On: 1 Jul, 2017 में

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बादलों ने घेरा था
मेरे दिल का आसमान,
हल्की सी बूंदा-बांदीं
ने छू लिए तपते अरमान।
आधी सूखी आधी गीली
थी अभी मन की बस्ती,
तभी बादलों की गड़गड़ाहट
ने जारी कर दिया फरमान।

हवाएं थी तेज़,बूँदों ने चूम ली
थी एहसासों की ज़मीन।
एक मीठी सी सिहरन
मुझे आगोश मे ले चली,
प्यार की पहली बारिश
मुझे भिंगोने चली।
चेहरे को चूम अधरों
पर रूकी,एक इन्द्रधनुष
सा खींच वो छूमंतर हो चली।

अंतरमन है तर पहली
बरसात से,धुली-धुली सी प्रीत
उज्जवल एहसास से।
अनुभुतियों की शीतलता
अब बहकाने लगी,
प्रीत की पहली बारिश
अधरों पर मुस्कुराने लगी।

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विनय सक्सेना के द्वारा
July 4, 2017

सुन्दर रचना …….लेखनी को बधाई …….विनय सक्सेना “ रिमझिम फुहार” 

विनय सक्सेना के द्वारा
July 4, 2017

सुन्दर रचना …. लेखनी को बधाई ….. विनय सक्सेना “ रिमझिम फुहार “ http://vinksaxena.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=1241089


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