meriabhivyaktiya

Just another Jagranjunction Blogs weblog

63 Posts

69 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 24183 postid : 1326830

जब होने लगे पूर्वाभास,,,जीवन की सांझ हो चली ,,,

Posted On: 26 Apr, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जीवन की सांझ हो चली है
वह भी जानती है वह अब जाने को है
समेट रही है अपनी ज़िम्मेदारियां
आहिस्ता-आहिस्ता,,,
बांट रही है जो है बचा-खुचा,,,
रोज़ गुछाती है घर-संसार अपने बेटा का,,,,
पता नही कौन सी शाम जीवन का सूरज ढल जाए,,।
कभी अलमारियों के कपड़े सहेजती है,,कभी रसोई की सफाईयां करती है,,,कभी भविष्य मे उसकी तकलीफों को कम करने के उपाय सोचती है,,,,और खुद को बहुत असहाय पाती है।
रोज़ बेटियों को फोन भी करती है,,,त्योहारों पर आशीष भी देती है,,,,,,,,,,,,,
क्योंकी वह जानती है जीवन की सांझ हो चली है,,,।
आंसूओं को छुपाती है,,,,जीवटता दिखाती है,,,पोती को पढ़ाती है,,स्कूल के लिए तैयार कराती है,,,उसके आने का इन्तज़ार करती है,,,,,गरम भात परसती है,,सब कुछ करती है,,,,,,,,,,क्योकी वह जानती है ,,,,
जीवन की सांझ हो चली है,,,,।
छोटी-छोटी गुजारिशें करती है,,,कुछ अटके कामों को करवाने की सिफारिशें करती है,,,,,,सबको खुश रखने की कोशिश करती है,,,,जानती हूँ अच्छे से,,,वो अकेले मे हाथ जोड़ भगवान के आगे खुद को अब बुला लेने की मिन्नते करती है,,,,,,,,क्योकि वह अब जानती है ,,,,,
जीवन की सांझ होने को है,,,
जीवन की सांझ होने को है!!



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran