meriabhivyaktiya

Just another Jagranjunction Blogs weblog

56 Posts

65 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 24183 postid : 1303860

अभिलाषा,,

Posted On: 30 Dec, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तुम तो निर्णय कर चुकी कि मैं तुमसे मिल न पाउँगा,
ज़िद मेरी भी सुनलो प्रियतमा मिले बिना न जी पाउँगा।

प्रेम सुवासित पुष्प प्रिये मै ह्दय लिए बस कालचक्र में बाधित हूँ ,
अवसर पा गजरे मे गुथ प्रिये तुम्हारे जुड़े मे गुथ जाउँगा।

जनमो से मै प्रीत का रीता खाली गागर लिए खड़ा,
तुम अमृत सरिता सी बहती मै डूब प्रेम-कलश भर जाउँगा।

अतृप्त,अधूरा, बिखरा-बिखरा आत्म मिलन को विह्वल हूँ,
दिव्य मिलन कर तुमसे प्रियतमा तुममे ही मिल जाउँगा।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Noopur के द्वारा
December 31, 2016

सुन्दर पंक्तियाँ

lily25 के द्वारा
January 10, 2017

धन्यवाद नूपुर जी ।


topic of the week



latest from jagran