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गुलाबी ठंड ने छेड़ी एक नई जुगलबंदो

Posted On: 23 Oct, 2016 में

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एक चादर और दो बदन
प्यार का एहसास और नरम सी छुवन

सांसों की सांसों से जुगलबंदी
नयनों की नयनों से कहा सुनी

बाहुपाश मे रंग बदलता अभिसार
गुलाबी सी सिहरन में प्यार का विस्तार

कलिदास की मेघदूत,तुम रवीन्द्र का संगीत
प्रीत की बांसुरिया पर थिरके पायलिया के गीत

अह्लादित भावों से करे प्रीत है श्रृगांर
लाज भरे नयन बने पिय गले का हार



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
November 23, 2016

कोमल भावों की ऐसी सुकोमल अभिव्यक्ति ! बहुत खूब ! बहुत सुंदर ! 


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