meriabhivyaktiya

Just another Jagranjunction Blogs weblog

63 Posts

69 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 24183 postid : 1208900

तुम्हारी यादें,,,,

Posted On: 20 Jul, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कभी तरन्नुम सी
कभी तब्बसुम सी
कभी हल्की सी
कभी बहकी सी
तुम्हारी यादें ,,,

आज बहुत थाम के बैठी हूँ
इनको , पर,,

कभी बज उठती हैं,
कभी चमक उठती हैं,
कभी सिहर जाती हैं,
कभी बिखर जाती हैं।

कभी धूप सी,
कभी घटा सी
कभी पुष्प सी,
कभी लता सी,
तुम्हारी यादें,,,,

आज बहुत बांध कर बैठी हूँ
इनको पर,,,,

कभी खिल उठती हैं,
कभी बरस उठती हैं,
कभी महक जाती हैं,
कभी लिपट जाती हैं।



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
July 21, 2016

अति सुंदर, सुकोमल एवं भाव-भीनी अभिव्यक्ति ।

lily25 के द्वारा
July 30, 2016

प्रशंसा एंव ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।

lily25 के द्वारा
July 30, 2016

धन्यवाद जितेन्द्र जी ।


topic of the week



latest from jagran